नज़रिया

मंत्री को एंकर बनाने का वक़्त अब आ गया है- रवीश कुमार

येदियुरप्पा ने किसानों की जितनी बात की है उतनी तो चार साल में देश के कृषि मंत्री ने नहीं की होगी। उन्हें ही कृषि मंत्री बना देना चाहिए और न्यूज एंकरों को बीजेपी का महासचिव। एक एंकर बोल रहा था कि येदियुरप्पा इस्तीफा देंगे। नरेंद्र मोदी कभी इस तरह की राजनीति को मंज़ूरी नहीं देते। […]

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आखिर क्यों शिक्षा व्यवस्था में बदलाव बेहद जरूरी- स्वाति श्रीवास्तव

शिक्षक समाज की सर्वाधिक संवदेनशील इकाई है। शिक्षक अपना काम ठीक तरह से नहीं करते- यह आरोप तो सर्वत्र लगाया जाता है। लेकिन यह विचार कोई नहीं करता कि उसे पढ़ाने क्यों नहीं दिया जाता ? आए दिन गैर-शैक्षिक कार्यों में इस्तेमाल करता प्रशासन, शिक्षकों की शैक्षिक सोच को, शैक्षिक कार्यक्रमों को पूरी तरह ध्वस्त […]

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जम्मू कश्मीर पर सरकार के नये फैसले पर पूर्व IPS अधिकारी के सवाल

क्या जम्मू और कश्मीर में आतंक का रास्ता अख्तियार कर अपने ही निर्दोष देशवासियों और सैनिकों का क़त्लेआम मचाने वाले आतंकी सचमुच मुसलमान हैं ? वे किसी भी अर्थ में मुसलमान नहीं हो सकते। फिर माहे रमज़ान का बहाना लेकर उन्हें एक महीने तक सैन्य कार्रवाई से छूट देने का क्या अर्थ है ? अगर […]

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ऐसे बचेंगी नदियाँ और पर्यावरण- राजेन्द्र

अन्न और जल के बिना जीवन सम्भव नहीं है। इस तथ्य से वाकिफ तो सभी है परन्तु इनके संरक्षण एवं बचत के प्रति संजीदा गिने चुने लोग ही हैं। आज भी समाज में ऐसे लोग हैं जिन्हें कड़ी मशक्कत के बाद भी एक जून की रोटी मयस्सर नहीं हो पाती वहीं दूसरी ओर ऐसा अभिजात्य […]

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जल दिवस पर विशेष- मर रहा है हमारी आंखों का पानी भी- राजेंद्र वैश्य

आज विश्व जल दिवस है। पानी को बचाने का संकल्प करने एवं पानी के महत्व को जानने का दिन। पानी का मोल प्यास लगने पर ही मालूम पड़ता है। कोई भी पेय पदार्थ पानी का विकल्प नही बन पाता। गला तर तभी होता है जब पानी की बूंदे हलक के नीचे उतरती है। पूरी दुनियां […]