भारत में मेडिकल शिक्षा कुछ स्थायी मिथकों से घिर गई है जिन्हें तोड़ना सबसे ज़रूरी है। ख़ानदानी और कुलीन परिवारों के कब्ज़े से इसे निकालने के लिए व्यापक सामाजिक समूह को भी मेडिकल शिक्षा के दायरे में लाना पड़ेगा। इन लोगों ने जानबूझ कर यह बात लोगों के दिमाग़ में बिठा दी है कि डॉक्टर […]
नज़रिया
दफ्तर में पुशअप मारने वाले राज्यवर्धन राठौर को वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार का खुला खत
माननीय राज्यवर्धन राठौड़ जी, आपका एक नया वीडियो देख रहा हूं जिसमें आप भारत सरकार के कार्यालय में पुश अप कर रहे हैं। उम्मीद है आपके मंत्रालय के सचिव, निदेशक और सभी कर्मचारी काम छोड़ कर पुश अप कर रहे होंगे। बिना काम छोड़े पुश अप तो हो नहीं सकता। मैं जानना चाहता हूं कि […]
राम तेरी गंगा मैली हो गई ! – ध्रुव गुप्त
आज गंगा दशहरा है। हमारे पूर्वज राजा भगीरथ की वर्षों की कठोर तपस्या के बाद गंगा नदी के स्वर्ग यानी हिमालय से पृथ्वी पर अवतरण का दिन। राजा भगीरथ एक लोक कल्याणकारी शासक के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने संभवतः सूखे और पानी की कमी से मरती अपनी प्रजा के कल्याण के लिए हिमालय […]
बलात्कार को देखने का हमारा नजरिया ही गलत दिशा में है – ध्रुव गुप्त
देश के कोने-कोने से जिस तरह नन्ही बच्चियों और किशोरियों के साथ सामूहिक बलात्कार और उनकी नृशंस हत्याओं की खबरें आ रही हैं, उससे पूरा देश सदमे में है। कभी आपने सोचा है कि आज देश में बलात्कार के लिए फांसी सहित कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान होने के बावज़ूद स्थिति में कोई बदलाव […]
मेरे पास कोई विकल्प नहीं है, मैं वैसे भी मारा जाऊँगा”
21 मई, 1991 को शाम के आठ बजे थे. कांग्रेस की बुज़ुर्ग नेता मारगाथम चंद्रशेखर मद्रास के मीनाबक्कम हवाई अड्डे पर राजीव गांधी के आने का इंतज़ार कर रही थीं। थोड़ी देर पहले जब राजीव गांधी विशाखापट्टनम से मद्रास के लिए तैयार हो रहे थे तो पायलट कैप्टन चंदोक ने पाया कि विमान की संचार […]
कभी ऐसी थी हमारी पत्रकारिता – ध्रुव गुप्त
देश की मीडिया अभी अपनी विश्वसनीयता के सबसे बड़े संकट से गुज़र रही है। अपवादों को छोड़ दें तो मीडिया की प्रतिबद्धता अब देश के आमजन के प्रति नहीं, राजनीतिक सत्ता और उससे जुड़े लोगों के प्रति है। कुछ मामलों में यह प्रतिबद्धता बेशर्मी की तमाम हदें पार करने लगी है। वह इलेक्ट्रोनिक मीडिया हो […]
यह रूह से रूह का रिश्ता है.. महसूस कीजिए
76 साल की उम्र में ‘दिल तो बच्चा है जी’ लिखने वाले गुलजार उर्फ सम्पूर्ण सिंह कालरा की जिंदगी की कहानी फिल्मों से बिल्कुल अलग है। अपनी नज्मों से हमारे अहसासों को मखमल सा हल्का कर देने वाले सम्पूर्ण सिंह कालरा उर्फ़ गुलज़ार का जन्म 18 अगस्त 1936 में दीना, झेलम जिला, पंजाब, ब्रिटिश भारत […]
मेरी तरह खुदा का भी खाना ख़राब है – हरिशंकर परसाई
कार्ल मार्क्स ने अगर कहा है –धर्म मनुष्यों के लिए अफीम है ,तो कुछ यों ही नहीं कह दिया है| धर्म की अफीम के नशे में भूले लोगों का शोषण हम देख रहे हैं ।हम गिरोह -के -गिरोह, संगठन-के-संगठन ‘अफ़ीमचियों’ के कारनामे देखते रहते हैं ।मगर का यह आखिरी वाक्य है ।इसके पहले उन्होंने धर्म […]
प्रधानमंत्री व्हाट्स अप यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर भी हैं -रवीश कुमार
मैं अब भी कर्नाटक चुनावों में नेहरू और भगत सिंह को लेकर बोले गए झूठ से ज़्यादा परेशान हूं। प्रधानमंत्री ने सही बात बताने पर सुधार की बात कही थी। सारे तथ्य बताने के बाद भी उन्होंने अभी तक सुधार नहीं किया है। मेरे लिए येदियुरप्पा प्रकरण से भी यह गंभीर मामला है। चुनाव तो […]
कूड़ा बीनने वाली महिला बनी सिटिज़न जर्नलिस्ट!
कूड़ा बीनने वालों को कूड़ा बिनता देख लोगबाग ऐसे नाक सिकोड़ते है मानो कूड़ा बीनने वाले इंसान नही बल्कि कूड़े का ढेर हो। उनके बग़ल से गुजरने पे लोगबाग ऐसा बच के निकलते है मानो उनके स्पर्श करते ही इनका शरीर किसी क्षतिग्रस्त इमारत के मानिंद भरभरा के गिर जाएगा। ऐसे ही अनुभवों से दिन-प्रतिदिन […]